मोरङिया थारुके ओसुवास हे गहनागुरिया

Logo
राजेश कुमार सरदार थारु / ग्रामथान प्रकाशित बुधबार, आषाढ १२, २०८१

मोरङिया थारु सौके आपने किसिमके भेषभुषाा छै । नेपालके तराइ भूभागमे बैठले मरद हे जलना सौ आपने रिति हे परम्परा अनुसारके ओसुवास हे गहनागुरिया लगछै । पहिनकर हे ओसुवास के बात करवै त एकरसियाके आपने किसिमके पहिरन र गहनागुरिया चलन चल्तीमे रहैक । मरदसौ धोति हे झोरीवाला कुर्ता जमा लगावेक जन त जलनासौ अचरा हे खडकी लगावेक । खडकी बहुत रंगमे लगल जयेक जेरेङकी डेडकछना खडकी, पोथी खडकी, माछएैच खडकी, कारयबुना खडकी, कचलार खडकी, गैजीबान खडकी, सरव पोथी खडकी, सुगर खोहार खडकी । मरदसौ धरिया लगावेक । बच्चासौ पुतली पिन्हेक । आदमीसौ पैदले लरेक । नहा त खरामके चफल लगावेक ।
छौडीसौ चोलिया नय लगावेक । अखने चोलिया भि लगावे लागलैस । खडकी डारसे तरतक लगल रहछै जनत अचरा डाडमे बानहीके उपरसे ल्याके तरतक पुछा बन्याके पिनछै जेरेंकी साडी लगछै । अचराके काते काते बहुते रंगमे फूलबुटा भोरल रहछै । सादा अचरा भि लगल जेछै । अचराके बिभिन परकार रहछै जेरेङकी टेकसर अचरा, ननसुत अचरा, आमछाप अचरा, टेरिकटन अचरा, केलापता अचरा, मोटिया अचरा, सुगापंखी अचरा । बुढना जलनासौ दबर, बनाथ हे मरदसौ सलगा होडेक ।

अचरा हे खडकी लगावे कारणसे एकरसियाके आपने बेगल पहिचान बनल छै । अचरा खडकी वशुवासके वजसे मोरङिया थारु आरोना थारुसे जल्दी पहिचानल जेछै । सकभर उजर अचरा लगछै । लेकिन आरोना रंगके अचरा भि लगल जेछै । खडकी के रंगमे बहुत प्रकारके रहछै । खडकी धिमाल जातीसौ तानसे बनछै ।

छौडीसौ खोपा बान्हेमे माहिर रहछै । झोेटना घुम्या घुम्या के बान्हीके खोपा बनछै जेरा देखे लगना बहुत अछा मानल जेछै । कोय सुनरी देखावे लगना खोपामे छिलापाती करछै मतलव खोपारामे फुलबुटा लग्याके मनमोहक बनछै । कोय कोय जकरा झोट कम रहछै त केसी आर लछा बानही के बडखा बनछै ।

जलनासौके आपन आङमे सिङारके रुपमे ठोप पिन्छै । ट्याङ, हात, छाती, पोखरमे फूल बुटा बन्याके ठोप लगछै । इटा ओकरसियाके बिशेष पहिचान हे शोख छेकै । जलना मात्र नय मरदसौ भि आपन पहिचान हे शोखके रुपमे गोदना पिन्छै ।

खासकरिके नारीसौ लगल गहना गुरयिा निम्न प्रकारके छै ।
पैरी– ट्याङमे लगावेवाला चानीके गहना
पायल– ट्याङमे लगावोला सधारण चानीके गहना
कडा– ट्याङमे लगावेवाला चानीके गहना
झालर– ट्याङमे लगावोला बुटावाला चानीके गहना
डेडकस – डाडमे लगावेवाला चानीके गहना
नथिया– नाकमे लगावेवाला गोयल आकारमे बनल सोनाके गहना
सिदबन– सिथिमे लगावेवाला सोनाके गहना
कुण्डल– कानमे लगावेवाला सोनाके गहना
लोर – कानमे लगावेवाला सोनाके गहना
मछरिया– कानके उपरमे लगावेवाला सोनाके गहना
कलौसी– कानके उपरमे लगावेवाला बुटावाला सोनाके गहना
खुटला– नाकमे लगावेवाला सोनाके गहना
ठोका– हातमे लगावेवाला गोयल अकारमे चानीके गहना
पात– हातके उपरकर भागमे लगावेवाला गोयल अकारमे चानीके गहना
हसली– घेचमे लगावेवाला चानीके गहना
जिजिर–हसलीमे जोडल घेचम लगावेवाला चानीके गहना
चनरहार– घेचमे लगावेवाला चानीके गहना
नकलेस– घेचमे लगावेवाला सोनाके गहना
टकाहार– टकाके बनल घेचमे लगावेवाला चानीके गहना
अङठी– एङुरमे लगावेवाला चानी आर सोनाके गहना
बला–हातमे लगावेवाला सोना, पितरके गहना
चुरी–हातमे लगावेवाला काँचके गहना
पंजा– हातमे लगावेवाला चानी आर सोनाके गहना
बिछिया– ट्याङके एङुरमे लगावेवाला चानीके गहना
कनबझा– कानमे सोनाके सिक्रीसे बानह्ल सोनाके गहना
टप– कानमे लगावेवाला सोनाके गहना
तिलौहरी– बिहा करल छौडीसौ लगावेवाला सोना जडित मल्ला
सिकड– घेचमे लगावेवाला सोना आर चानीके गहना

मोरङिया थारुसौ लगावेवाला गहनागुरयिा आर पहिरनमे आरोना जातिसे फरक छै । मतर अखने आधुनिक जमानासङे एकरसियामे बहुत परिवर्तन एल छै । फिर भि एकरसियाके वशुवास हे गहना गुरयिाके वजसे मोरङिया थारुसौ जल्दिये चिन्हल जेछै । यहारा एकरसियाके मौलिक हे अदितिय पहिचान छेकै ।

 

तपाईको प्रतिक्रिया दिनुहोस
हाम्रो बारे

ग्रामीण नामक साप्ताहिक पत्रिका द्वरा सञ्चालीत ग्रामीण पत्रिका डटकम www.graminpatrika.com । साथै यो  “ एक बहुभाषिक पत्रिका ”  हो ।

पत्रिका दर्ता नं २८०

हाम्रो टीम

सम्पादक तथा प्रकाशक :-संजय कुमार राजवंशी

सम्पर्क

केन्द्रीय कार्यालय:-राजधानी विराटनगर, कोशी प्रदेश

सम्पर्क नम्बर :- 9827072150,9842555493
इमेल :- [email protected]